TY - GEN AU - Pant, Sumitranandan TI - Chidambara SN - 9788126704910 (hbk.) PY - 2024/// CY - New Delhi PB - Rajkamal Prakashan N1 - Includes bibliographical references and index N2 - छायावाद के प्रमुख स्तम्भ सुमित्रानंदन पंत की काव्यचेतना का प्रतिबिम्बन है ‘चिदंबरा’। इसमें कवि के 1937 से 1957 तक की बीस वर्षों की विकास-यात्रा की झलक मिलती है। स्वयं पंत ने स्वीकार किया है कि ‘चिदंबरा’ में उनकी भौतिक, मानसिक, आध्यात्मिक संचरणों से प्रेरित आन्तरिक लयबद्धता व्याप्त है। ‘युगवाणी’ से लेकर ‘अतिमा’ तक की रचनाओं के इस संचयन में पंत की काव्य-चेतना का संचरण ‘चिंदबरा’ में परिलक्षित होता है। पंत ने भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दर्शनों से जीवनोपयोगी तत्त्वों को लेकर अपनी रचनाओं में भरे-पूरे मनुष्यत्व का निर्माण करने का प्रयास किया है जिसकी आवश्यकता आज भी बनी हुई है। ER -